गरबों की धुन पर देर रात तक थिरके युवक-युवतियां


कुमकुम ना पगला पड्या…गुजराती गानों पर पाण्डालों में देर रात तक गरबा की धूम
सांचौर। शक्ति की उपासना में लीन शहर सहित आसपास के गांवों में लोगों के कदम रात आठ बजे बाद गरबा पाण्डालों की ओर बढ़ जाते हैं। युवा और बच्चे पारम्परिक गरबा परिधानों में सजकर नृत्य में लीन हो जाते हैं। शहर दरबार चौक स्थित अम्बे माता मंदिर, ठाकुरजी मंदिर, सुभाष चौक, माहेश्वरी कॉलोनी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में गरबा और डांडिया खेला जा रहा है। कहीं जनता तो कहीं कलाकार देवी-देवताओं की वेशभूषा में प्रस्तुति दे रहे हैं। हालांकि शहर में अभी अधिकांश पाण्डालों में गरबा देखने और खेलने वाले कम हैं। आयोजकों का मानना है कि कुछ दिनों में लोग पाण्डालों में उमड़ेंगे। युवक-युवतियां नए परिधान में सज-धजकर पाण्डालों में पहुंचना शुरू होते हैं। कुमकुम ना पगला पड्या…,तारा नाम नी चुंदड़ी ओढी…,पंखिड़ा ओ पंखिड़ा…,केसरियो रंग तने लाग्यो…सरीखे गीत पांडालों में गुंजायमान होते हैं तो कदम स्वतरू थिरकने लगते हैं। गुजराती गीतों पर युवक-युवतियो ने गरबा नृत्य किया। शहर सहित आसपास के गांवों में गरबा महोत्सव के आयोजन की धूम मची हुई है। रात आठ बजे आरती के बाद नृत्य प्रारंभ होता है। गुजराती वेशभूषा पहने गरबा के गीतों पर नृत्य करते है। देर रात तक चलने वाले आयोजन में लोगों की भीड़ उमड़ रही है। इससे इन दिनों शहर सहित आसपास के गांवों में चहल-पहल व रौनक बढ़ी। वहीं सिद्धेश्वर गांव में भी गरबा महोत्सव आरती के बाद डांडिया नृत्य किया जा रहा है। गरबा महोत्सव के दौरान नाटक, रामलीला कई प्रकार की झांकिया निकाली गई। कलाकारों की और से किए गए भावपूर्ण भव्य व रोचक अभिनय ने दर्शकों का समा बंाधे रखा। देर रात को रामलीला मंचन में कलाकारों की और से किए गए। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

error: Content is protected !!